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डालना चाहते है टूटे हुए दिल में नई जान ? तो जान ले बात…

डालना चाहते है टूटे हुए दिल में नई जान ? तो जान ले बात...

SPECIAL

डालना चाहते है टूटे हुए दिल में नई जान ? तो जान ले बात…

टूटे दिल से मिले ज़ख्मो से उबरना बहुत आसान काम नहीं है। लम्बे समय तक अपने साथी के साथ रहते हुए आपकी जीवन शैली में कई बदलाव आ चुके होते हैं। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि किसी को छोड़ देने कि अपेक्षा किसी के द्वारा छोड़ दिया जाना अधिक पीड़ादायक होता है। आपके सम्मान को गहरी ठेस पहुँचती है। वैसे टूटे हुई रिश्ते दोनों सूरत में मुश्किल ही होते हैं।

ब्रेक-अप / टूटे दिल से उभरने के लिए टिप्स

इस बारे में सोचना सामान्य है। लेकिन इस सोच में डूब जाना आपको इस मुश्किल से बाहर नहीं निकलने देगा। अपनी गलतियों और अपने अतीत से सीखना अच्छी बात है। इस सोच से बाहर निकलना मुश्किल है लेकिन पूरे मन से प्रयास कीजिये और अपने दिमाग को दूसरी और लगाइये। धयन रहे कि आपका असल उद्देश्य इस सब से बाहर निकल कर फिर से सामान्य होना ही है।

●          अपने दोस्तों से मिलकर अपने दिल के भाव उनसे बांटिये। ये सच है कि दुःख बांटनें से ही काम होता है। शराब के जाम के साथ अपने दिल का गुबार निकाल देना सही इलाज है।

●          नकारत्मक भाव से बचिए। ये सामान्य है कि रिश्ता ख़त्म होने के बाद भी आपके मन में अपने पूरब साथी के प्रति गुस्सा होगा। उन् सभी चीज़ों को अपनी ज़िन्दगी से बाहर कर दीजिये जो आपको अपने अतीत कि याद दिलाती हैं। शायद इससे आपको मदद मिले।

●          अपने आप पर ध्यान दीजिये। अच्छी नींद,अच्छा भोजन और थोडा व्यायाम।. वो करिये जो कारण आप को हमेशा से पसंद था। शाम को टहलने जाइये, या फिर व्यस्त रहयने के लिए घर के काम में अपनी माँ का हाथ बांटिये।

●          कोई नया शौक विकसित करिये जैसे कि संगीत या कोई स्पोर्ट्स जैसे कि फुटबॉल इत्यादि। अपने दिमाग और शरीर को व्यस्त रखिये। व्यस्त रहना इस से बाहर निकल पाने का मूलमंत्र है।

● सकारत्मक सोच रखिये। सुनने में मुश्किल है, लेकिन सकारत्मक सोच आपकी मदद करेगी। प्यार फिर से मिलने कि कोई उम्र या समय नहीं होता।

● डिप्रेशन के संकेतों को ध्यान में रखें। और अगर आपको लगे कि आप में वो संकेत हैं तो बाहरी परामर्श लेने से बिलकुल न हिचकें। निचे लिखी हुई सूची से मदद लें:

● ड्रग्स या नशे कि और रुख बिलकुल न करें। इसने दूर रेह्कर ही आप अपनी मदद कर पाएंगे।

और अंत में, यदि ज़रूरत महसूस हो तो निम्नलिखित में से किसी पेशेवर मनोवैज्ञानिक कि मदद लेना एक अच्छा उपाय होगा।

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